पुरस्कार

आईसीसीआर ने कई पुरस्कारों की स्थापना की है जो लोगों को परस्पर जोड़कर विभिन्न साधनों द्वारा अन्य देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों के संवर्धन के इसके जनादेश के लिए विदेशी नागरिकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए प्रदान आईसीसीआर ने कई पुरस्कारों की स्थापना की है जो लोगों को परस्पर जोड़कर विभिन्न साधनों द्वारा अन्य देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों के संवर्धन के इसके जनादेश के लिए विदेशी नागरिकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए प्रदान किए जाते है । ये पुरस्कार हैं -

  1. प्रतिष्ठित भारत-विज्ञ पुरस्कार - प्रशस्ति पत्र, स्वर्ण मंडित पदक और 20000 अमरीकी डॉलर का नकद पुरस्कार -

    भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा 2015 में आयोजित प्रथम विश्व भारत-विज्ञ सम्मेलन के दौरान वार्षिक “आईसीसीआर प्रतिष्ठित भारत-विज्ञ पुरस्कार” की स्थापना की गई थी जिसका प्रयोजन विश्व भारत-विज्ञ सम्मेलन की दिशा को भारत लाना और विश्व भर में भारतीय अध्ययन को प्रोत्साहित करने हेतु विद्वानों को एक मंच पर लाकर विचार-मंथन करना है। यह पुरस्कार विदेशों में भारतीय अध्ययन के किसी भी क्षेत्र में अध्ययन , शिक्षण और अनुसंधान में उनके योगदान के लिए एक विदेशी विद्वान को प्रदान किया जाता है।

  2. विश्व संस्कृत पुरस्कार - प्रशस्ति पत्र, स्वर्ण मंडित पदक और 20000 अमरीकी डॉलर का नकद पुरस्कार –

    विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने जून 2015 में बैंकॉक में आयोजित 16वे विश्व संस्कृत सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान विदेशी विद्वानों के संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने में किए गए योगदान को मान्यता देने हेतु वार्षिक "विश्व संस्कृत पुरस्कार" की घोषणा की। यह पुरस्कार एक विदेशी विद्वान को संस्कृत भाषा और साहित्य में अध्ययन, अध्यापन और शोध में उनके योगदान के लिए दिया जाता है।

  3. प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार - प्रशस्ति पत्र और प्लॉक
    भारत सदैव विदेशी छात्रों और विद्वानों के लिए अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को समृद्ध करने के लिए एक आकर्षक गंतव्य रहा है। स्वतंत्रता के बाद से, भारत सरकार ने विदेशी छात्रों का भारत में अध्ययन करने के लिए हमेशा स्वागत किया है। आईसीसीआर में विदेशी छात्रों के लिए एक व्यापक छात्रवृत्ति कार्यक्रम है और यह भारतीय संस्थानों में अकादमिक के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर और अनुसंधान के स्तर पर भारतीय प्रदर्शन / दृश्य कला के क्षेत्रों में पाठ्यक्रम करने के लिए प्रतिवर्ष विश्वभर के देशों के छात्रों को 6500 से अधिक छात्रवृत्ति प्रदान करता है। भारत में अध्ययन करने वाले विदेशी छात्र भारत के सद्भावना दूत हैं और समय के साथ, उन्होंने अपने-अपने देशों में प्रभावशाली पदों को प्राप्त किया है। भारत में पढ़ चुके विदेशी छात्रों की उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करते हुए 2015 में “आईसीसीआर विशिष्ठ पूर्व छात्र पुरस्कार” की स्थापना की गई थी। यह पुरस्कार उन विदेशी नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने संबंधित देशों के लोगों के बीच भारत की समझ, सद्भावना और मित्रता को बढ़ावा देने में योगदान दिया है ।
  4. गिसेला बॉन पुरस्कार – प्लॉक
    आईसीसीआर ने प्रसिद्ध जर्मन पत्रकार, लेखक, पर्यावरण कार्यकर्ता और भारत-विज्ञ, गिसेला बॉन के नाम पर भारत-जर्मन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उनकी सेवाओं के सम्मान में 1996 में वार्षिक गिसाला बॉन पुरस्कार की शुरुआत की । यह पुरस्कार भारत-जर्मन मित्रता को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रतिवर्ष एक जर्मन नागरिक को प्रदान किया जाता है।