पुरस्कार

आईसीसीआर ने अनेक पुरस्कारों की स्थापना की है, जिन्हें विभिन्न आयामों के माध्यम से लोगों से लोगों के बीच संपर्क स्थापित करके, अन्य देशों में भारतीय संबंधों के संवर्धन के इसके जनादेश में विदेशी नागरिकों को उनके योगदान के लिए प्रदान किए जाते है। ऐसे पुरस्कारों में शामिल हैं -

ए) विशिष्ट भारतविज्ञ पुरस्कार

भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा आयोजित प्रथम विश्व विज्ञान सम्मेलन के दौरान 2015 में वार्षिक "आईसीसीआर विशिष्ट भारतविज्ञ पुरस्कार" की स्थापना की गई थी, जिसमें विदेशों में भारतीय अध्ययन को बढ़ावा देने के प्रयोजन से विचार-विमर्श करने हेतु विश्व भर के प्रमुख भारतविज्ञों को भारतीय विद्वानों के साथ एक मंच पर लाया गया। यह पुरस्कार भारतीय अध्ययन की किसी भी विधा में अध्ययन, शिक्षण और अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए एक विदेशी विद्वान को प्रदान किया जाता है।
इस पुरस्कार के पुरस्कार विजेता निम्नलिखित हैं:-

क्र.सं. वर्ष पुरस्कार विजेता का नाम देश
1. 2015 प्रोफ़ेसर हेनरिक फ्रीहेर वॉन स्टेनक्रॉन जर्मनी
2. 2016 प्रोफ़ेसर यू लांग यू चीन
3. 2017 प्रोफ़ेसर हिरोशी मारुई जापान

बी) विश्व संस्कृत पुरस्कार

विदेश मंत्री स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज ने संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने में विदेशी विद्वानों के योगदान को मान्यता देते हुए जून 2015 में बैंकॉक में आयोजित 16वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान वार्षिक "विश्व संस्कृत पुरस्कार" प्रदान करने की घोषणा की थी। संस्कृत भाषा और साहित्य में अध्ययन, शिक्षण और अनुसंधान में उनके योगदान के लिए एक विदेशी विद्वान को पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
इस पुरस्कार के पुरस्कार विजेता निम्नलिखित हैं:-

क्र.सं. वर्ष पुरस्कार विजेता का नाम देश
1. 2015 शाही महामहिम राजकुमारी महा चकरी सिरिनधोर्न थाईलैंड
2. 2016 प्रोफ़ेसर जॉर्ज कार्डोना संयुक्त राज्य अमेरिका
3. 2018 प्रोफ़ेसर अशोक नरहर अलुजकर कनाडा

सी) विशिष्ट पूर्व-छात्र पुरस्कार

भारत हमेशा से विदेशी छात्रों और विद्वानों के लिए अपनी अकादमिक उत्कृष्टता को समृद्ध करने के लिए एक आकर्षक गंतव्य रहा है। आजादी के बाद से भारत सरकार ने हमेशा विदेशी छात्रों का भारत में अध्ययन करने के लिए स्वागत किया है। आईसीसीआर में विदेशी छात्रों के लिए एक व्यापक छात्रवृत्ति कार्यक्रम है। यह भारतीय संस्थानों में स्नातक-पूर्व, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर भारतीय प्रदर्शन/दृश्य कला में अकादमिक और अन्य पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए विश्व भर के देशों के छात्रों को प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में छात्रवृत्तियां देता है। भारत में अध्ययन करने वाले विदेशी छात्र भारत के सद्भावना राजदूत हैं और उन्होंने समय के साथ अपने-अपने देशों में प्रभावशाली पद हासिल किए हैं। भारत में अध्ययन करने वाले विदेशी छात्रों की उपलब्धियों को पहचानते हुए, "आईसीसीआर विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार" 2015 में स्थापित किया गया था। भारत और उनके देश के लोगों के बीच समझ, सद्भावना और मित्रता को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए भारत में अध्ययन करने वाले विदेशी नागरिकों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
इस पुरस्कार के पुरस्कार विजेता निम्नलिखित हैं:-

क्र.सं. वर्ष पुरस्कार विजेता का नाम देश
1. 2015 महामहिम श्री ले लुओंग मिन्ह वियतनाम
    महामहिम सुश्री जेनेबु तदस्से वोल्डेटसदिक इथियोपिया
    श्रीमती मिलेना साल्विनी फ़्रांस
2. 2016 डॉ. सोई विन म्यांमार
    श्रीमती सरिता बुद्धू मॉरीशस
    प्रोफ़ेसर आई. केतुट विडन्या इंडोनेशिया
    डॉ. लौरा जिब्रातोवना यरेकेशेवा कज़ाकस्तान
    डॉ. गैलिना रूसेवा सोकोलोवा बल्गारिया
3. 2017 सुश्री सुश्री रिज़वाना चौधुरी बनण्य बांग्लादेश
    सुश्री ऐशाथ सफ़ूफ़ा मालदीव
    डॉ. समन केलेगमा (मरणोपरांत) श्रीलंका
    सुश्री डोल्लापूर्ण फुक्खोंग थाईलैंड
    डॉ. सिरोजिडिन एस नूरमातोव उज़्बेकिस्तान
4. 2018 महामहिम डॉ. काबा उरगेसा डिंस्सा इथियोपिया
    श्री बुई बा बोंग वियतनाम
    डॉ. कॉन्स्टेंटिनो जेवियर पुर्तगाल
    श्री अजमल हमीद अब्दुलरहीमजा अफ़गानिस्तान
    श्री डाम्चो दोरजी भूटान
5. 2019 श्री मोहम्मद मीरवाइज बाल्की अफ़गानिस्तान
    सुश्री मक़ददसा यौरीश अफ़गानिस्तान
    सुश्री मोनिका डे ला फ्यूएंटे स्पेन
    श्री टेंडाई पडेंगा ज़िम्बाब्वे

इन पुरस्कारों की स्थापना का उद्देश्य न केवल अपने-अपने देशों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में विदेशी विद्वानों के योगदान को स्वीकार करना था बल्कि युवा शिक्षाविदों को अकादमिक क्षेत्रों में भारत की उत्कृष्टता के प्रति जागरूक करना भी था। इन पुरस्कारों से विदेशों में भारत के बारे में अपार सद्भावना हुई है और भारत में युवा विद्वानों के हित बढ़ें हैं।

डी) गिसेला बॉन पुरस्कार – प्लॉक

आईसीसीआर ने प्रसिद्ध जर्मन पत्रकार, लेखक, पर्यावरण कार्यकर्ता और भारत-विज्ञ, गिसेला बॉन के नाम पर भारत-जर्मन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उनकी सेवाओं के सम्मान में 1996 में वार्षिक गिसाला बॉन पुरस्कार की शुरुआत की । यह पुरस्कार भारत-जर्मन मित्रता को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रतिवर्ष एक जर्मन नागरिक को प्रदान किया जाता है।